पापा मैं छोटे से बड़ी हो गयी क्यों ?
पापा के निगाहों में, ममता के छाओं में,
कुछ दिन और रहती तो क्या बिगड़ जाता।
पापा मैं छोटे से बड़ी हो गयी क्यों ???
करूँगा मैं विदा तुझे हाय किस दिल से ,
सोचू जब यही तोह मैं रह जाऊ हिल के।
पर मेरी बेटी तुझे जाना तो होगा,
तूने जिसे चाहा उसे पाना तोह होगा।
कल रात मैं यह गाना सुन रही थी , सुनते -सुनते मुझे यह एहसास हुआ कि क्यों हमें अपने ही माँ -बाप को छोड़ कर किसी पराये घर जाना होता है। माँ -बाप के दिए सीख को किसी और के ख़िदमत में लाना होता है.
पापा मुझे शिकायत है आपसे। माँ मुझे शिकायत है आपसे। आपकी मैं आँखों का तारा हूँ तो क्यों मुझे किसी गैर के हाथों में सौंप देते है। आप कहते है कि आप हमसे जान से भी ज़्यादा प्यार करते है , हमें विदा करने से आप बिखर जायेंगे टूट से जायेंगे। फिर अपने यह कैसे कह दिया कि -" मेरी बेटी तुझे जाना ही होगा ,तूने जिसे चाहा उसे पाना ही होगा। " पापा ये अपने कैसे तय कर लिया की मैंने उसे चाहा है सिर्फ और जिन्होंने मुझे ज़िन्दगी दी, चाहत का मतलब समझाया ,मैंने उन्हें नहीं चाहा? मैंने पापा आपको, माँ आपको नहीं चाहा या आप लोगो को छोड़ना चाहा? पापा आपसे ज़्यादा तो मुझे इस दुनिया में कोई प्यार नई कर सकता और मैंने ये भी सुना है की हम जिससे प्यार करते है उन्हें अपने से कभी दूर नहीं होने देते है. और इलज़ाम मुझपे क्यूँ ?? मैं नहीं जाना चाहती। पापा मुझे डर लगता है.
देखा है मैंने बहुत से माता -पिता को , वो अपने बेटी की शादी तय होने से उनके विदा होने तक के समय में। वो अपने खून-पसीने की कमाई एक-एक करके लगा देते है पर फिर भी वो अपनी बेटी के ससुराल वालों को संतुष्ट नहीं करा पाते। छोटी सी छोटी ख्वाहिशों को पूरा करने से लेकर बड़ी सी बड़ी मांग तक पूरी करते है। फिर भी लड़की के माँ-बाप को सम्मान नहीं मिलता। पापा बेटी हु मैं आपकी , अपने मुझे पैदा किया है ,परवरिश की है आपने मेरी। माँ अपने मुझे हर अच्छी-भली सीख दी है। फिर भी माँ आपके होंठों से एक डर को ज़ुबाँ क्यों मिलती है ? क्यों आपको लगता है कि आपकी सीख में कोई कमी न हो। क्यों माँ? आप हमेशा यह बोलती है की अच्छे से रहना वरना ससुराल में तक़लीफ़ होगी। क्यों होगी मुझे तकलीफ़ माँ पापा ??
जब आपने मेरे ससुराल वालों की हर छोटी -बड़ी ख्वाहिशों को पूरा किया है। उनके हर नखरे उठाये है तब तो उन्हें आपका एहसान मंद होना चाहिए। आपका तो दर्ज़ा सबसे ऊँचा होना चाहिए, क्यूंकि अपने उन्हें अपनी सबसे अनमोल चीज़ दे रहे और यहाँ तक की उनकी इतनी हैसियत तक नहीं वो आपकी बेटी का ऐशो आराम के साथ रख सके. अपने उसका भी बंदोबस्त उसके सुख-सुविधा का सामान भी उन्हें दिया है। अपनी बेटी के साथ-साथ उनके बेटे क लिए भी। उन्होंने तो नहीं दिया अपना अनमोल बेटा। फिर भी पापा सिर आपका झुका रहता है. शिकायत है मुझे ऐ समाज तेरे बनाये इस रिति-रिवाज़ों से. मुझे शिकायत है इस जहान से, जहाँ एक माँ-बाप को अपनी बेटी गावं कर भी सम्मान नहीं मिलता।।।
एक आवाज़ मेरे इस दिल से……
प्यार के रिश्ते से जन्म लेकर आती है वो
प्यार से खुशियों की बरसात करती है वो
घर आँगन को किलकारियों से गुंजाती है वो
बड़ी होकर उसी आँगन को दीये से सजाती है वो
छोटे-बड़े की इज़्ज़त बखूबी करती है वो
रिश्तो को संजो कर रखती और निभाती है वो
रूठे जो कोई अपना तो जान लगा के मानती है वो
हर मुसीबतों से उभर कर सामना करती है वो.
एक बेटी के रूप अनेक पर जब बेटी बहु बने
न पूछो किन किन मुसीबतों का सामना करे
बेटे को अपने बहु से न कोई मोले
बल्कि उसके लाए हुए दहेज़ से है तोले
पर कोई कभी ये क्यों न है सोचें
कि बेटे बहु दोनों एक से समान ही होते
फिर भी बहु को विदा कराने को वह लाखो रूपए है मांगते
और मुस्कुराके है बोलते बहु के सुख-सुविधा क ही है सब वास्ते
पर वो कभी यह नहीं है जाने की अपने ही बेटे को वह खुद ही बेच देते
'दूल्हा बिकाऊ है' जितने में चाहो ले जाओ, और बोली है लगा देते.