साथी तुम याद बहुत आओगे
जब भी पल्टून्गी पन्ने
किस्सों के , शरारत भरे लम्हों के ,
तुम याद बहुत आओगे .
याद आएंगे कॉलेज के सुनहरे
दिन
बिताये साथ में सुहाने पल ,
जिस पल में थी खुशिया और
साथ ही एक दिन बिछड़ने का ग़म .
साथी तुम याद तो बहुत आओगे
.
न जाना न सोचा था , साथ मिलेगा
तुम लोगों सा,
कि साल यूँ बीत जायंगे जैसे
रात का कोई प्यारा सपना.
याद आयेंगी स्टूडियो में
बैठ कर इलास्टिक से खेलना,
रेड हैण्ड के नाम पर हाथ के
साथ गाल को भी लाल करना.
याद आयंगी रोज़ आइसक्रीम
खाना ,
कैंटीन में बैठ घंटो तफरी
काटना ,
याद आयेंगा एक दुसरे को
छेड़ना.
साथी तुम याद बहुत आओगे.
आउटिंग पे जाना उधम मचाना ,
बच्चो से भी हद बदमाशियां
कर गुज़ारना.
याद आयेंगा एक दुसरे को
सताना, रूठना और मानना .
एक दुसरे से खफ़ा होना, फिर
कभी न बात करने का फैसला करना,
और फिर एक उनके बुलावे पर
सब कुछ भूल कर दौड़ कर जाना.
साथी तुम याद बहुत आओगे .
किस्से हमारे कारनामो के
याद आयंगे,
जब भी पुरानी तस्वीरे सामने
आयंगी
वो लड़ाई वो झगडे वो तकरार
और फिर कभी न दूर जाने की बात.
साथी याद बहुत आओगे.
बर्थडे जैसे स्पेशल दिन पर
जानबूझ कर अकेला महसूस कराना ,
रुलाना और खुद उनसे ज्यादा
बुरा फील करना.
फिर रुला कर सरप्राइज दे बेहिसाब
खुशियाँ दे जाना.
याद आयेगा हर पल को यादगार
बनाना .
ट्रिप्स प्लान कर हवाई महल
खड़ा करना
कुछ का पूरा होना और कुछ का
खयाली पुलाव होकर रह जाना.
एक दुसरे के पेरेंट्स को
मानना और न मानने पर पास में ही घूम कर आना ,
और कहना. ‘कि यह आउटिंग ये
ट्रिप्स तो है एक बहाना, असली मकसद तो साथ में है समय बिताना ' .
परिवार में दोस्त तो के मिल
जाते है, पर दोस्तों में परिवार सिर्फ किस्मत वालो को ही मिलते है.
साथी तुम याद बहुत आओगे.
dedicated to u all my mjmc close friends....
Rabinshu Rajsi Nidhi saurabh Ashwin Sonali zakariya.. love u friends.
