एक धुंधली सी बाते याद आती है,
जब भी तेरी यादे याद आती है.
उस पल की कुछ मुलाकाते याद
आती है.
जब भी तेरी तस्वीरे सामने
आती है.
उन पलो की खुशिया मुस्कुरा
जाती है,
फिर लबो पे एक कसक छोड़े जाती है.
कभी न भरने वाले ज़ख्म कूरेत
जाती है,
कुछ अनकहे-अनसुने से सवाल
छोड़ जाती है.
पूछने पे यूँही चुप हो जाती
है,
हजारों खवाहिशे अधूरे छोड़
जाती है.
पलट के भी पन्ने पलट नहीं
पाते है,
बार-बार वो किस्से याद
आजाते है.
रातों को, तारों से तेरी
खैरियत पूछा करते है,
तेरे नाम के भंवर में खुदको
फसाया करते है.
तेरे न होने के एहसास से
खुदको बचाया करते है,
तेरी ख़ुशी की दुआये हर साँस
में करते है.
तुझसे मिलने की फरियाद हर बरसात से करते है,
मायूस होकर बस खुद को राहों में भिगोया करते है.
by.. khushi (kusum)
