Sunday, 19 April 2015

Maa....

       माँ…
















आँखे खुलते ही जिस के चेहरे की तलाश हो, वो आप हो.
आँखे बंद होने से पहले जिसका चेहरा आस पास, हो वो आप हो.
             छोटी सी छोटी बात को  प्यार से समझाने का हुनर आप का हो.
             और बड़ी बातों को इत्मीनान से समझाने का तज़ुर्बा आप का खास  हो.
बचपन की कहानिया सुनाते -सुनाते बड़ा करने वाली आवाज़ , आप की हो.
और वहीं गलती करने पर बरसने वाली आवाज़ भी  आपकी हो। 
              मुसीबतों में घीरे होने पर भगवान  से पहले याद आने वाला नाम, आपका हो.
              और खुशियों में सबसे पहले शामिल होने वाली पेहचान आपकी हो.
ज़ख्म हमारे हो पर उसका एहसास आपकी आँखों में हो।
हमें ठीक होता देख खुशियों की बारिश भी आपकी आँखों से हो.
               बढ़ने वाला हर एक पहला  कदम  आपके हांथो से हो. 
              और लौट कर आने वाला कदम भी आपके ही तरफ हो.
 हर एक ख्वाहिशों में ख्याल आपका हो
 हर दुआओं में नाम आपका हो
 माँ आप हमारी बंदगी हो
 माँ आप हमारी ज़िन्दगी हो.  
 ................kusum(khushi)

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