Wednesday, 14 September 2016

इंतज़ार












कैसे गुजारु ये दिन ये रात,
कैसे संभालू अपने ये जज़्बात .
एक वो है जो समझते नहीं,
और एक वक़्त है जो रुकता नहीं.
कोशिश लाख मेरी हार जाती है,
फिर नयी कोशिश को पुकार जाती है .
वो समझे तो समझाऊ अपनी दास्ताँ,
वो सुने तो सुनाऊ अपने दिल की व्यथा.
कहते है खामोशियों की अपनी एक अलग जुबान होती है,
कोई सुनने आये तो बताऊ की क्या कुछ दबाएँ बैठी है.
एक एक पल को जोड़ कर ज़िन्दगी बनायीं है,
उस एक पल में उनकी तस्वीर सजायी है.
इंतज़ार में उनके उमरे गंवाई है,
चाहतो से भरी आस  लगायी है .
चांदनी रातों में तारों से अपनी दुनिया सजाई है,
उनके आने की सदायें हवाओं में सुनी है.
आईने के सामने सजे खुद को कई बार देखा है, 
फिर उसी आइने में खुद को टूटते हुए भी देखा है.  
अतीत के पन्नो में जीवन संजो कर रखा है,
पलट कर जीने को दुबारा मन आज भी करता है .


By.. kusum khushi



Thursday, 9 June 2016

Guzarish..











गुजारिश है तुझसे कभी किसी का दिल न दुखाना.
कोई मुश्किल हो राहों में तो उसे दूर करना ,
न मिले कुछ तुम्हे तो उसे अहंकार बना कर खुद पे हावी न होने देना ,
ज़िन्दगी उतार चढ़ाव का नाम है,
कभी धूप तो कभी छाँव है .
इसका मतलब ये भी नहीं कि तू हर वक़्त समझौते करता रहे .
ज़रूरत पड़ने पे हक़ के लिए लड़ना भी होगा तुझे,
बंदिशे तोड़ दुनिया को साबित करना भी होगा तुझे.
ग़म से रिश्ता जोड़ना तो कोई नहीं चाहता ,
पर खुशिया मिलने पे ग़म से रिश्ता तोडना भी नहीं .
भूल मत जाना जीवन के पहिये है ये ,
सिक्के के दो पहलु है ये .
भूल भी जाना ग़म को तो उन्हें न भूलना
जो साथ थे तेरे ग़म के सागर में.
तू भी कभी किसी का एहसान मत भूलना
खुशियों में नहीं तो ग़म में हर किसी का साथ देना.
कोई याद रखे न रखे तुझे पर तेरे अच्छे कर्म सभी याद रखेंगे
तुझे दिमाग से नीकाल भी दे पर दिल से कभी नहीं निकालेंगे.
कोई कितनी भी खता करे , कोई कितना भी बड़ा गुनाह कर दे,
तू माफ़ उसे हमेशा करना .
माफ़ी का मतलब ये नहीं कि तू छोटा हो जायेगा
 माफ़ी देकर तुझे भी ज़िन्दगी का एक अनुभव हो जायेगा.
चेहरों की हर रंगत से तेरा सामना हो जायेगा.
माफ़ कर ज़िन्दगी में शामिल ज़रूर करना उन्हें
पर दूबारा विश्वास करने की भूल मत कर बैठना .
सच्चे होंगे तो बात को समझ कर साथ आ जायेंगे
और नियत में छलना होगा. तो तुझे फिर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.
तुझे पता है ज़िन्दगी का फलसफा क्या है.
निस्वार्थ और बिना किसी से उम्मीद लगाये जीना ,
स्वार्थ आ भी जाये तो कोई मुश्किल नहीं,
स्वार्थ तो चीजों को चाहना सिखाता है.
पर उम्मीद कभी किसी से नहीं लगाना
जो पाना है खुद को काबिल कर हासिल करना 
कामयाबी की चाहत में काबिलियत को मत भूल जाना
गुजारिश है तुझसे कभी किसी का दिल न दुखाना.


By …
Khushi(kusum)



Tuesday, 10 May 2016

साथी तुम याद बहुत आओगे ......




साथी तुम याद बहुत आओगे
जब भी पल्टून्गी पन्ने किस्सों के , शरारत भरे लम्हों के ,
तुम याद बहुत आओगे .
याद आएंगे कॉलेज के सुनहरे दिन
बिताये साथ में सुहाने पल ,
जिस पल में थी खुशिया और साथ ही एक दिन बिछड़ने का ग़म .
साथी तुम याद तो बहुत आओगे .
न जाना न सोचा था , साथ मिलेगा तुम लोगों सा,
कि साल यूँ बीत जायंगे जैसे रात का कोई प्यारा सपना.
याद आयेंगी स्टूडियो में बैठ कर इलास्टिक से खेलना,
रेड हैण्ड के नाम पर हाथ के साथ गाल को भी लाल करना.
याद आयंगी रोज़ आइसक्रीम खाना ,
कैंटीन में बैठ घंटो तफरी काटना ,
याद आयेंगा एक दुसरे को छेड़ना.
साथी तुम याद बहुत आओगे.
आउटिंग पे जाना उधम मचाना ,
बच्चो से भी हद बदमाशियां कर गुज़ारना.
याद आयेंगा एक दुसरे को सताना, रूठना और मानना .
एक दुसरे से खफ़ा होना, फिर कभी न बात करने का फैसला करना,
और फिर एक उनके बुलावे पर सब कुछ भूल कर दौड़ कर जाना.
साथी तुम याद बहुत आओगे .
किस्से हमारे कारनामो के याद आयंगे,
जब भी पुरानी तस्वीरे सामने आयंगी
वो लड़ाई वो झगडे वो तकरार और फिर कभी न दूर जाने की बात.
साथी याद बहुत आओगे.
बर्थडे जैसे स्पेशल दिन पर जानबूझ कर अकेला महसूस कराना ,
रुलाना और खुद उनसे ज्यादा बुरा फील करना.
फिर रुला कर सरप्राइज दे बेहिसाब खुशियाँ दे जाना.
याद आयेगा हर पल को यादगार बनाना .
ट्रिप्स प्लान कर हवाई महल खड़ा करना
कुछ का पूरा होना और कुछ का खयाली पुलाव होकर रह जाना.
एक दुसरे के पेरेंट्स को मानना और न मानने पर पास में ही घूम कर आना ,
और कहना. ‘कि यह आउटिंग ये ट्रिप्स तो है एक बहाना, असली मकसद तो साथ में है समय बिताना ' .
परिवार में दोस्त तो के मिल जाते है, पर दोस्तों में परिवार सिर्फ किस्मत वालो को ही मिलते है.
साथी तुम याद बहुत आओगे.

    dedicated to u all my mjmc close friends....
Rabinshu Rajsi Nidhi saurabh Ashwin Sonali zakariya.. love u friends.