..... .. नकाबी रिश्ते........
ग़लत फ़हमी यूँ तो न हो दर्मिया
ग़र हो भी जाये तो भी क्या हो बुरा?
चेहरे से नकाब उतर जायंगे,
कुछ पल के मिले साथी बिछड़ जायेंगे .
कौन अपने है कौन बेगाने नज़र आजायेंगे,
कुछ फ़रिश्ते से रिश्ते नज़र आएंगे,
तो कुछ ढोंगी रिश्ते नज़र से उतर जायेंगे.
साथ निभाने वाले कभी छला नहीं करते ,
और जो छलते है वो साथ रहा नहीं करते .
यूँ तो हर एक इन्सान ग़लत तो नहीं,
पर सुनी सुनाई बातो पे अब विश्वाश भी नहीं.
मानना बस इतना सा है मेरा,
खेलते है जज्बातों से जो लोग सभी के,
वो खुश और सगे तो कभी हुआ नहीं करते...
by.. kusum (khushi)

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