Friday, 20 November 2015

.....................DO JAHAAN..................
                       .............BY..kusum(khushi)...............

zindagi bhi teri ti or rasta bhi tujh tak tha
jis mod se mudi zindagi, us mod pe khada ghar tera ta
ruk na sake kadam us mod par
soch jo takleef thi w bhi tere liye ti
khud se kabhi kiya na pyaar
par dil ki tadap me chhupa dard tere liye ta
kitna socha, kitna roka khudko wahaan par
ankhon me aansu jo tere liye ta
zindagi me bas dekhti rahi tujhe aaina bana kar
ek pal me jo aaina tuta to yakeen na ta
tut kar bikhar gayi mai wahi par
paaon me chubha wo jo kal tk palkon pe baitha mera sapna ta
khamosh nazron se dekhti rahi bas
hasti zindagi kab khamosh hogae
ek pal ko to andaaza bhi na tha
kab mai is jahaan se rukhsat hogae
zindagi me saath na zindagi ka
haathon ki lakeere mitne lagi thi
sochti hu kyu chali thi us raah par
 jaha do jahaan ki dushmani basi ti...........

............dedicated to those who never get thier love in thie life.....bcoz of different CASTE nd COMMUNITY..........

Sunday, 20 September 2015

.....बंदिशें .....

नहीं रहना मुझे पहरों में,
नहीं जीना मुझे बंदिशों में .
सांसे मेरी थमने लगी है, 
धड़कने मेरी रुकने लगी हैं.
नज़रे जिसे ढूंढा  करती है ,
वो राहतें कहीं गुम हो गयीं हैं .
खुशियाँ मेरी उदासी  बन गयी है ,
मुस्कान मेरी खो गयी है .
ढूंढू  कैसे अपनी हंसी को,
कदम कदम पे रुकावटें खडी  हैं .
ज़माने हो गए  जिए हमें ,
अब मौत को गले लगाने की तमन्ना जगी है.
ज़िन्दगी मुस्कुराके हर एक ज़ख्म दे जाती है,
अपनाने के सिवा कोए रास्ता नहीं छोडती है .
कौन चाहता है रोना,
पर खुशियाँ मिले ,ऐसी खुशनसीबी कहा है ,
ज़ंजीरो में हु कैद, आजाद करने वाला कौन है .
हांथों में लकीरें तो दे दिया रब ने ,
पर उन लकीरों को ज़िन्दगी से जोड़ना भूल गया वो..... 

Thursday, 13 August 2015


         थकन

एक भ्रह्म् सा था जो आज टुटा सा है,
कोई अपना सा था जो आज छूटा सा है .
किसी को अपना मान कर जी रहे थे,
वो छलावा था आज पता चला है हमे.
हमने कोशिश बड़ी की थी संजोय रखने को उन्हें,
पर जैसे चाहत ही उनकी कोई और थी.
यकीन नहीं होता उनके अल्फाज़ो का,
उन्होंने कहा गलत या हमने सुना ही गलत.
कैसे समझ लू उनकी बातो को,
जब उन्होंने समझा ही नहीं हमारे जज़बातों को.
अब हर एक सचाई मन गढ़न कहानी लगती है,
अब कैसे जीये इस कहानी के सहारे.
हम खुशफहमी में जीते रहे पता नहीं क्यू,
आज दूर हुई गलतफैमी थी जो.
चाहते आज भी है हम की समझ जाये वो हमारी मजबूरिया,
पर समझाने की कोई वजह न रही.
आँखे नम है आज मेरी चेहरे पर उदासी है,
पर आंसू जिनके नाम का है वो आँखे बंद रखा है।
थक चुकी हूँ मै उन्हें समझा के उन्हें पुकार के
पर उन्होंने मेरी सुननी ही कब का छोड़ दी है।

Monday, 29 June 2015

Barsat Ke Suhane Din..

                      छोटी सी कहानी से
बारिशों  के पानी से
सारी वादी भर गयी           
न जाने क्यूँ दिल भर गया
न जाने क्यूँ आँख भर गयी...

कहाँ गएँ वो दिन कहा खो गयी वो गलियां जिस गलियों घूमते, फिरते, खेलते थे . आज भी याद आते है वो खुबसूरत बचपन के पल  . वो सुहाने बरसात के दिन जब हम सुबह उठते थे और मम्मी से पूछते थे की मौसम कैसा है और मम्मी   बोलती थी की बारिश हो रही है . फिर हम झटपट उठकर खिड़की से बहार झांकते और माँ से बोलते इतनी बारिश में स्कूल कैसे जायेंगे ? और माँ बोलती जैसे सभी जाते है . और फिर फीका सा मन बना के स्कूल  जाने की तैयारी करते . ऐसा नहीं था  की बारिश पसंद नहीं थी बारिश तो पसंद इतनी थी पर सिर्फ घुमने खेलने में स्कूल जाने में नहीं . पर माँ ने बोला तो स्कूल तो जाना ही था . फिर ये सोचते की स्कूल  तो जा  राहे है पर बाकि के दोस्त आयंगे भी . फिर चुपके पापा का फ़ोन उठा के दोस्तों को फ़ोन लगते ते की कोन कौन आ रहा  है . जब ये पता चलता कि सभी आ राहे  है तो मन इतना खुश की ख़ुशी का ठिकाना नहीं. तैयार होकर स्कूल को निकलते छाता लेकर , बारिश को महसूस करते हुए . पुरे रस्ते ऊछल –कूद मचाते हुए . जूते को पूरा पानी में भीगा कर स्कूल पहुचते. छतरी को क्लासरूम के बहार खोल के रखते और फिर अन्दर जाते . सबसे पहले प्रेयर होती और फिर हम लोग बैठते, बैठते ही हम सभी लोग की बाते  शुरू हो जाती बाते तो इतनी की जैसे सदियों से न मिले हो . फिर प्लान करते की शाम को कहा मिलना है बारिश में कहा घूमना है. फिर सर कहते की अब बस करो बाते और बुक्स निकालो . हम सभी लोग मन मार के बुक कॉपी निकल तो लेते पर पढने में मन किसका लगता . सरे दिन खिड़की के बहार ही झांकते रहते और पहाड़ियों को निहारते रहते . पहाड़ो की हरियाली देख कर मन तृप्त हो जाता . इतना खुबसूरत मौसम की मानो जन्नत हो. और बहार जाना एक सपना .हम जहा रहते है वो पहाड़ी इलाका है सोनेभाद्र . बरसात के मौसम में चारो तरफ हरियाली ही हरियाली छा जाती थी . अब क्या कर सकते थे स्कूल में आने के बाद सिर्फ शाम को ही बहार घुमने को सोच सकते थे . जैसे तैसे स्कूल के घंटे बिताते थे . और छुट्टी होने में कितना वक़्त और है गिनते थे . और छुट्टी  होने तक बारिश रुक न जाये मनाते रहते थे . जैसे ही बेल लगती पुरे क्लास में ज़ोर से आवाज़ आती , हुर्रे ! छुट्टी होगई . हम सब लोग बहार निकलते और उछलते कूदते भीगते घर को निकलते .बारिश की बूंदों से चेहरे को भिगोते और खुद भी भीग जाते.

घर पहुचते और माँ  से बोलते खाना खाना है और शाम को है घुमने जाना है माँ  बोलती की हां ठीक है पर जाओ कपडे बदलो वरना बीमार हो जाओगी . खाना खाते और शाम होते ही घुमने निकल जाते मई मेरी दो सहेलिय सना और सपना . हम एक ही स्कूटी पे तीनो सवार होकर घूमते . पुरे कॉलोनी क चक्कर कटते सुहाने मौसम का आनंद उठाते .  रिमझिम बरसात से खुदको भिगाते और गाना गाते ..
रूकती है थमती है
कभी बरसती है
बदल पे पाँव रखे
बारिश मचलती है...आ..आ..आ.
रूकती है थमती है -2
ला ..ला..
छोटी सी कहानी से
बारिशों के पानी से .........नजाने क्यूँ आंख भर गयी ..

उस पल में ख़ुशी तो इतनी मिलती थी की मनो ज़िन्दगी यही है बस. न आगे की फिक्र न कल बिछड़ने की ग़म . क्यूंकि सोचा ही नहीं था की हम कभी अलग होंगे .हम सब बहुत मस्ती करते थे .

  अब कहा है ऐसे दिन अब हम सब अलग अलग जगह पर है . अब है साथ तो बस सुनहरी यादें . हम दूर भले ही होगये है पर  हमारी दोस्ती में कोई फर्क नहीं पड़ा . हम आज भी मिलके पुरानि  ज़िन्दगी को जीने की कोशिश करते है पर कभी हम तीनो में से एक साथ नहीं होता  तो कभी ये मौसम . कभी वक़्त नहीं  होता तो कभी वक़्त पे हम . 









Friday, 15 May 2015

जज़्बात


जज़्बात .......

दिल को सुकून दे ऐसी बात कहाँ ,
जिए ख़ुशी से ऐसी किस्मत  कहाँ।
हम तो कोशिश कर कर हार चुकें ,
कोई  प्यार से हमे मनाये ऐसे हालत कहाँ।
जब भी पूछती खुद से कि क्या है पहेली?
खुशियाँ भुला दे ऐसी क्या है मज़बूरी ?
पलके बिछाये, आस लगाये सोचती हूँ मै ,
क्या है ऐसी तकलीफ जो भुला ना  पाती।
बस सोचती रहती कमी क्या थी मुझमे,
जो वो हुए न हमारे।
इंतज़ार करती हु उनके लौटने का ,
नज़रे ढूंढा  करती है उन्हें राहों में।
ये जानते हुए की वो नहीं आएंगे,
पर क्यूँ इस पागल दिल को समझाया करती हूँ।
बहुत पुकारा उन्हें दिल के गहराईयों से,
खो दिया खुद को उन्हें पाने की चाहत में.
मिला क्या मुझे दर्द के सिवा ,
जिसे प्यार किया उसने ही ठुकराया।
साथ चलना है हमे उसने कहा ता ,
पर राहे  अलग होंगी , ये कहा बताया था मुझे।
खेलता रहा वो मेरे जज्बातों से ,
और मै थमी सब लुटती रही।
ये कैसा हिसाब है वफ़ा का ,
यहाँ तो एक तरफ़ा इंसाफ है।
पूरी खुशिया उनके हिस्से में ,
तो मेरे हिस्से खुशिया पाने की सिर्फ प्यास है?







Sunday, 19 April 2015

DOSTI




......... DOSTI..........

 Humne Jo chaha waisa dostana mila
Zindagi ke har mod par haath thamne wala mila..
Zindagi toh kat hi jati girte uthte
Par kadam kadam par sambhale wala sahara mila

Dosti kya hai hum nahi jante par, agar
Koe puchh de humse toh hum khoobsurat se chehre dikhate
Jo hote tum sabhi  ( Sapna​, Sana​ sujeet Monika​ Siddharth​  )
Toh ehsaas ek hota pyaara sa...

Hume kabhi na karna dur inse ae khuda
Ye Jaan hai hamari tu toh hai sab janta
Koe samjhe toh pehchan hai ye hamari
Koe jiye toh zindagi hai yeh hamari

Hatheliyon ki pyaari si ek lakeer, haanthon ki ungaliyan or muthi ki takat hai hamari
Alag kar sake na Hume chah kar Bhi koe
Himmat toh dur soch me Bhi woh takat nahi....
Dedicated to all my best friends....love u frndzzz

Maa....

       माँ…
















आँखे खुलते ही जिस के चेहरे की तलाश हो, वो आप हो.
आँखे बंद होने से पहले जिसका चेहरा आस पास, हो वो आप हो.
             छोटी सी छोटी बात को  प्यार से समझाने का हुनर आप का हो.
             और बड़ी बातों को इत्मीनान से समझाने का तज़ुर्बा आप का खास  हो.
बचपन की कहानिया सुनाते -सुनाते बड़ा करने वाली आवाज़ , आप की हो.
और वहीं गलती करने पर बरसने वाली आवाज़ भी  आपकी हो। 
              मुसीबतों में घीरे होने पर भगवान  से पहले याद आने वाला नाम, आपका हो.
              और खुशियों में सबसे पहले शामिल होने वाली पेहचान आपकी हो.
ज़ख्म हमारे हो पर उसका एहसास आपकी आँखों में हो।
हमें ठीक होता देख खुशियों की बारिश भी आपकी आँखों से हो.
               बढ़ने वाला हर एक पहला  कदम  आपके हांथो से हो. 
              और लौट कर आने वाला कदम भी आपके ही तरफ हो.
 हर एक ख्वाहिशों में ख्याल आपका हो
 हर दुआओं में नाम आपका हो
 माँ आप हमारी बंदगी हो
 माँ आप हमारी ज़िन्दगी हो.  
 ................kusum(khushi)

Sunday, 8 March 2015

Ek mulakaat or kuch baat...Rajsi Swaroop

एक मुलाकात और कुछ प्यारी सी हुए बात चुलबुली, शरारती, बातूनी, नटखट और समझदार राजसी स्वरुप से। 11 अप्रैल 1994 में नवाबों के शहर लखनऊ में जन्म लेने वाली राजसी अपने नाम की तरह अपनी ज़िन्दगी जीने में भरोसा रखती है। "राजसी " यानी की शाही ठाठ बाट। राजसी से बात करके उन्हें जानने का मौका मिला और बहुत सी अच्छी और खट्टी मीठी बातों का पता चला।  आइये आप भी इनका हिस्सा बनिए हाज़िर है आपके सामने छोटी सी  कोशिश राजसी की ज़िन्दगी को समझने की.

 राजसी अपने बारे में कुछ बताइये ?
कुसुम मै बहुत ही बिंदास और स्ट्रैट फॉरवर्ड  लड़की हु. मैं जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशंस,( लखनऊ यूनिवर्सिटी ) की   पोस्ट ग्रेजुएशन की  छात्रा हु. मेरा  छोटा सा परिवार है जिसमे मेरे पिता माता  बड़े भाई             और  मैं हु।
राजसी आपने  अपनी स्कूल की पढ़ाई कहाँ  से की है ?
(मुस्कुरा कर) वैसे तो मैंने किसी एक स्कूल से अपनी पढ़ाई नहीं की है मेरे कई  सारे स्कूल बदले  है. हम पहले लखनऊ में किराये पे रहते थे तो उस दौरान हमने के किराये के माकन बदले। तो स्कूल के आने जाने का खर्च और समय को थोड़ा सा व्यवस्थित करने के लिए मैंने पास के ही स्कूल में एडमिशन लिया।

अच्छा तो कितने स्कूल बदले है अपने ?
नर्सरी से बारह्वी तक में चार। नर्सरी से कक्षा २ तक st. teresa , कक्षा 3 से 5 happy  hours , 6  से 10 baby  martin , 11 से 12th st joseph . और ग्रेजुएशन मैंने ramadheen singh girls degree college से B.Com किया है।

फ्रेंड्स या फ्रेंडशिप में भरोसा रखती है ? कितने  फ्रेंड्स है आपके?
हाँ  मैं फ्रेंडशिप और फ्रेंड्स सभी में भरोसा रखती हु।  यहाँ तक की मेरी बचपन की चार दोस्त है जो मेरी आज भी काफी अच्छी दोस्त है। जो है दीपिका प्रीती शहनाज़ और  ज़ोया।  यह फ्रेंड्स मेरी ऐसी है जो मेरे लिए कुछ भी कर सकती है और मैं  इनके लिए। ये  ज़िन्दगी  का हिस्सा ही नहीं ज़िन्दगी है।

 ज़िन्दगी के किस मोड़ पे आपको ऐसा लगा कि दोस्त आपकी ज़िन्दगी का हिस्सा नहीं ज़िन्दगी है?
कोई ऐसा किस्सा जो आप बताना चाहे?
जी ज़रूर! हुआ यूँ था कि  जब मैंने अपनी स्कूलिंग कम्पलीट करी और दूसरे कॉलेज में एडमिशन लिया तो स्कूल फ्रेंड्स से मैं  काफी कटने लगी। और नयी नयी कॉलेज की दुनिया में रहने लगी. मुझे लगता ता कि  अब कॉलेज के ही फ्रेंड्स मेरे फ्रेंड्स है। पर मैं ये भूल गए थी की कॉलेज में बहुत ही काम ऐसे लोग मिलते है जो भरोसे के लायक होते है। मुझे काफी मतलबी लोग मिले थे जो सिर्फ अपना काम निकलवाना जानते थे।  बुरा लगा जब जाना फिर काफी उदास भी रहने लगी थी. फिर मेरी यह फ्रेंड्स मुझसे मिली, मुझे होसला दिलाया, समझाया और फिर मै वापस से इनसे जुड़ गयी. फिर एहसास हुआ सच्चे फ्रेंड्स ही होते है जो कैसे भी किसी भी तरह हमे पाकर रहते है.

कोई ज़िन्दगी में शामिल ऐसा शख्स जो आपके दिल के बहुत करीब हो? जिनके साथ  आप हमेशा  रहना चाहती हो भविष्य देखती हो जिनमे अपना?
नही. फिलहाल तो नहीं।  पर तलाश है। तलाश पूरी होने पे आपको जरूर बताउंगी।

अच्छा राजसी अपने जैसा बताया की अपने B .com  किया है. फिर अपने जौनलिस्म एंड मास  कम्युनिकेशंस क्यू चुना? 
दरअसल कुसुम मुझे ज्यादा आईडिया नहीं ता इस कोर्स के बारे में और न ही मेरे पेरेंट्स को मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी का मेरिट देखा और अपना मेरिट देखा तो मुझे ये लगा की मेरा इसमें सिलेक्शन मुश्किल है. तो मैंने फॉर्म ही नहीं डाला और b.com का फॉर्म दाल के ग्रेजुएशन पूरा कर लिया. उस्ले बाद मुझे पता चला की लखनऊ यूनिवर्सिटी में सिर्फ पोस्ट ग्रेजुएशन  होते है इसमें और बैचलर कोर्स एफिलिएटेड कॉलेज  में होते है. अफ़सोस तो हुआ पर फिर मास्टर्स इसी में करने को ठान  ली।

आपकी सोशल लाइफ कैसी है ? 
सोशल लाइफ मेरी बहुत अच्छी है लोगों से मिलना जुलना उनसे बात करना मुझे पसंद है. फिर चाहे वो रियल ज़िन्दगी हो या वर्चुअल।
मैं  अपना काफी समय सोशल नेटवर्किंग साइट्स को देती हु।  ट्विटर पे ज्यादा समय देती हु.  फेसबुक और ब्लॉग पे भी अक्सर एक्टिव रहती हु.

सोशल एक्टिविटीज में आप मानती है? अगर आपको मौका मिले किसी NGO  से जुड़ने का तो आप किससे  जुड़ना पसंद करेंगी?
जी मुझे सोशल एक्टिविटीज़ में काफी दिलजस्पि है. असल में मैंने एक NGO   के बारे में पता भी लगाया है जो बेटियों के सुरक्षा के लिए मुहीम चलाती है. जो नन्ही बेटियों को जन्म देकर लावारिस छोड़ देती है उन्हें आसरा  देने का। मैं  इनसे ज़रूर जुड़ना चाहूंगी।

आप अपना कर्रिएर किस्मे बनाना चाहती है? मैंने ये सुना था की आप R J बनना चाहती है कहा तक सही है ये?
मैं  स्पोर्ट्स प्रेसेंटर बनना चाहती हु.  मुझे स्पोर्ट्स में काफी इंटरेस्ट है. चाहे वो कोई भी हो. हाँ मैंने ये सोचा था कि मैं  R J  बनूँगी पर बनती उससे पहले ही मेरी आँख   खुल गई की R J की की सिर्फ पॉपुलैरिटी ही होती है पास उनके असली जीवन के बारे में कोई जल्दी नहीं जान पता की उन्हें कितनी कमाई होती है. जो की बहुत काम होती है।  तो मैंने R J बनने का ख्वाब अपने ख्यालों से निकाल  दिया।

आपको अपने कंट्री का बेस्ट पार्ट क्या लगता है ? और वह क्या है जो आप चेंज करना चाहेंगी ?
मुझे अपनी कंट्री आर्मी अच्छी लगती है. अगर मुझे मौका मुले उनसे जुड़ने का तो मैं जरूर जुड़ना चाहूंगी उनसे। और जो मुझे चेंज करना है अपनी कंट्री में वह है एजुकेशन सिस्टम में। जो तरह तरह के बोर्ड्स होते है सीबीएसई ICSE उप्र  बोर्ड ये सब. मई एक ही बोर्ड लाना चाहूंगी जिसमे बच्चे अपने मर्ज़ी से अपने विषयों को चुन  कर पढ़ाई कर सकते है. अपनी मर्ज़ी के मुताबिक न साइंस न कॉमर्स न आर्ट्स जैसा  कोई स्ट्रीम।

राजसी अगर आप एक दिन के लिए अदृष्य होगयी तोह वह कौन  सी चीज़े है जो आप करना चाहेंगी?
अपने कंट्री और खुद के लिए।
(मुस्कुराते हुए ) अगर मुझे ऐसा अवसर मिला तो मई देश के सारे दुश्मनो को बम से उड़ा  दूंगी।
और मैं हृतिक  रोशन की बहुत बड़ी फैन हु तो मैं उसके हर समय आस पास रहके उसे देखना चाहूंगी।  बस इतना सा ख्वाब है.

राजसी आपके पेरेंट्स अगर आपसे अभी चाहे की आप शादी कर ले तोह आप क्या करनेंगी?
मैं आपको ये बताना जरूर चाहूंगी की मेरे ज़िन्दगी में ये मोड़ आ चूका है जब मई ग्रेजुएशन के 2nd ईयर में थी तभी मेरे माँ बाप चाहते थे की मई शादी कर लू.पर मैंने साफ़ साफ़ इंकार कर दिया कि मुझे कर्रिएर में कुछ करना है. शादी नहीं करनी अभी।

लाइफ में ऐसा मोड़ आये  जब आपकी शादी हो चुकी हो और आपका एक बेबी हो और आपके अपने बच्चे और कर्रिएर में से किसी एक को चुनना पड़े क्यूंकि  आपका बच्चा छोटा है। तो क्या करेंगी आप?

जी मैं अपने कर्रिएर से ब्रेक लेना जरुरी समझूंगी।  क्यूंकि मेरे बच्चे को मेरी उस वक़्त सबसे ज्यादा ज़रूरत होगी. और अगर मैंने ऐसा न किया तो मैं किसी चीज़ में अच्छी साबित नहीं हो सकूंगी. और अगर मुझमे वो कैलिबर है तो जॉब तो फिर से अजाएगी.

और अगर उसके बाद आपके हस्बैंड आपको  जॉब न करने दे तो?
मैं ऐसे इंसान से शादी ही नहीं करना चाहूंगी। और फिर भी वो ऐसा निकला तो मैं  उससे अलग होना चहुंगी.

किस तरह को आप परवरिश अपने बच्चे को देना चाहेंगी आज के बदलते जनरेशन में  ?
मई अपने बच्चे से कम्युनिकेशन अच्छा रखना चाहूंगी।  ताकि कल को कुछ भी हो मरा बच्चा मुझे हर एक चीज बता सके.

कोई ऐसी बात है बचपन से की जिसे आप आज भी सोच के है पड़ती है?
जी. जब मेरा एडमिशन होना  था  नर्सरी में तो मेरे मम्मी पापा ने मुझे अपने नाम और सब  कुछ सीखा के भेजा थ. जब टीचर ने मुझसे पूछा की आपके मम्मी का नाम क्या है तो मैंने बोला की कल बताउंगी पापा का पूछा तो फिर यही बोला मैने. फिर टीचर ने मुझे एडमिट करते हुए बोला की ठीक है कल बताना।

जाते जाते एक थॉट बताइये जो आप फॉलो करती है?
ज़िन्दगी में कभी झूट न बोलना....


















 



Wednesday, 4 March 2015

Meri Pehchaan......














ज़िन्दगी में कदम रखा बेटी बनकर,
निभाएं रिश्ते मैंने दिल से अपना मान कर, 
कसक उठी मन में तो एक ख्याल आया, 
कसूर क्या था मेरा जो मुझे बोझ बनाया। 
उम्मीद  न थी की  ऐसा भी होगा, 
मेरे ईमान और त्याग का कोई मोल न होगा। 
प्यार के नाम पे अपमान मिलेगा ,
कदम-कदम पर ठहराओ  मिलेगा। 
आइना जो देखती हूँ ,खुद से यह पूछती हूँ ,
है क्या? पहचान मेरी जो इन कोहरो में है ढकी.
काजल  से लिखने जो बैठी अपने वज़ूद की कहानी, 
तो ज़मीर से यह आवाज़ है आई. 
कोरा  कागज़ है जब ज़िन्दगी तेरी ,
करले लाख तू कोशिशे इन्हे सजाने की ,
रंगत  नहीं है लौटने वाली तेरे   इस हसीन चेहरे की। 
सुनते ही मंन  झल्लाया मेरा, 
ठोकर लगी तो एसास हुआ, 
कौन है अपना ? जब सबने है ठुकराया यहाँ। 
जब आए  थे अकेले और जाना हैं अकेले ,
तो क्यू  ढूँढना  किसी और का सहारा। 
जो हुए न हमारे वे होंगे क्या किसी और के 
आज़ाद होने  दे मुझे अब इन पंछियो  की तरह. 
देखने दे चेहरा मुझे भी तेरा ऐ ज़ालिम दुनिया, 
जब सभी को है यहाँ अधिकार एक समान , 
तो हमें भी है हक़ खुले आसमान में उड़ान भरने का. 


Tuesday, 17 February 2015

papa main chhote se badi hogayi kyun????

पापा मैं छोटे से बड़ी हो गयी  क्यों ?
पापा के निगाहों में, ममता के छाओं में, 
कुछ दिन और रहती तो क्या बिगड़ जाता। 
पापा मैं छोटे  से बड़ी हो गयी क्यों ???

करूँगा मैं विदा तुझे  हाय किस दिल से ,
सोचू जब यही तोह मैं रह जाऊ   हिल  के। 
पर मेरी बेटी तुझे जाना तो होगा, 
तूने जिसे चाहा उसे पाना तोह होगा।

कल रात मैं यह गाना सुन रही थी , सुनते -सुनते मुझे यह एहसास हुआ कि  क्यों हमें अपने ही माँ -बाप  को छोड़ कर किसी पराये घर जाना होता है। माँ -बाप के दिए सीख  को किसी और के ख़िदमत  में लाना होता है.
पापा मुझे शिकायत है आपसे। माँ मुझे शिकायत है आपसे। आपकी मैं आँखों का तारा हूँ तो क्यों मुझे किसी गैर  के हाथों में सौंप देते है।  आप कहते है कि आप हमसे जान से भी ज़्यादा प्यार करते है , हमें विदा करने से आप बिखर जायेंगे टूट से जायेंगे।  फिर अपने यह कैसे कह दिया कि -" मेरी बेटी तुझे जाना ही होगा ,तूने जिसे चाहा उसे पाना ही होगा। " पापा ये अपने कैसे तय कर लिया की मैंने उसे चाहा है सिर्फ और जिन्होंने  मुझे  ज़िन्दगी दी, चाहत का मतलब समझाया ,मैंने उन्हें नहीं चाहा? मैंने पापा आपको, माँ आपको नहीं चाहा या आप लोगो को छोड़ना चाहा? पापा आपसे ज़्यादा तो मुझे इस दुनिया में कोई प्यार नई कर सकता और मैंने ये भी सुना है की हम जिससे प्यार करते है उन्हें अपने से कभी दूर नहीं होने देते है. और इलज़ाम मुझपे क्यूँ ?? मैं नहीं जाना चाहती।  पापा मुझे डर लगता है.
देखा है मैंने बहुत से माता -पिता को , वो अपने बेटी की शादी तय होने से उनके विदा होने तक के  समय में।  वो अपने खून-पसीने की कमाई एक-एक करके लगा देते है पर फिर भी वो अपनी बेटी के ससुराल वालों को संतुष्ट नहीं करा पाते। छोटी सी छोटी ख्वाहिशों को पूरा करने से लेकर बड़ी सी बड़ी मांग तक पूरी करते है। फिर भी लड़की के माँ-बाप को सम्मान नहीं मिलता। पापा बेटी हु मैं आपकी , अपने मुझे पैदा किया है ,परवरिश की है आपने मेरी। माँ अपने मुझे हर अच्छी-भली सीख दी है। फिर भी माँ आपके होंठों से एक डर को ज़ुबाँ क्यों मिलती है ? क्यों आपको लगता है कि आपकी सीख में कोई कमी  न हो।  क्यों माँ? आप हमेशा यह बोलती है की अच्छे से रहना वरना ससुराल में तक़लीफ़ होगी। क्यों होगी मुझे तकलीफ़ माँ पापा ??
जब आपने मेरे ससुराल वालों की हर छोटी -बड़ी ख्वाहिशों को पूरा किया है।  उनके हर नखरे उठाये है तब तो उन्हें आपका एहसान मंद होना चाहिए। आपका तो दर्ज़ा सबसे ऊँचा होना चाहिए, क्यूंकि अपने उन्हें अपनी सबसे अनमोल चीज़ दे रहे और यहाँ तक की उनकी इतनी हैसियत तक नहीं वो आपकी बेटी का ऐशो आराम के साथ रख सके. अपने उसका भी बंदोबस्त उसके  सुख-सुविधा का सामान भी उन्हें  दिया है। अपनी बेटी के साथ-साथ उनके बेटे क लिए भी।  उन्होंने तो नहीं दिया अपना अनमोल बेटा। फिर भी पापा सिर आपका झुका रहता है. शिकायत है मुझे ऐ समाज तेरे बनाये इस रिति-रिवाज़ों से. मुझे शिकायत है इस जहान  से, जहाँ  एक माँ-बाप को अपनी बेटी गावं कर भी सम्मान नहीं मिलता।।।
         एक आवाज़ मेरे इस दिल से…… 
प्यार के रिश्ते से जन्म लेकर आती है वो 
प्यार से खुशियों की बरसात करती है वो 
घर आँगन को किलकारियों से गुंजाती है वो 
बड़ी होकर उसी आँगन को दीये से सजाती है वो
छोटे-बड़े की इज़्ज़त बखूबी करती है वो 
रिश्तो को संजो कर रखती और निभाती है वो  
रूठे जो कोई अपना तो जान लगा के मानती है वो 
हर मुसीबतों से  उभर कर सामना करती है वो. 

एक बेटी के रूप अनेक पर जब बेटी बहु बने 
न पूछो किन किन मुसीबतों का सामना करे 
बेटे को अपने बहु से न कोई मोले 
बल्कि उसके लाए हुए दहेज़ से है तोले 
पर कोई कभी ये क्यों न है सोचें 
कि बेटे बहु दोनों एक से समान ही होते 
फिर भी बहु को विदा कराने को वह लाखो रूपए है मांगते  
और मुस्कुराके है बोलते बहु के सुख-सुविधा क ही है सब वास्ते 
पर वो कभी यह नहीं है जाने  की अपने ही बेटे को वह खुद ही बेच देते 
'दूल्हा  बिकाऊ है' जितने में चाहो ले जाओ, और बोली है लगा देते.